अयोध्या(संदीप श्रीवास्तव)-राज्यपाल के आदेश को नजरअंदाज कर बना दिया पशुपालन विभाग का अधिष्ठाता

राज्यपाल के आदेश को नजरअंदाज कर बना दिया पशुपालन महाविद्यालय का अधिष्ठाता
 🔹 वरिष्ठता को दरकिनार करते हुए दागी प्राध्यापक को किया गया महिमामंडित
🔹 विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति ने पशु पशुपालन महाविद्यालय के अधिष्ठाता की गोड़ी थी सेवा पुस्तिका
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मिल्कीपुर-अयोध्या
 आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज में अनियमितताओं का जमकर बोलबाला है। यहां कुलाधिपति के आदेश निर्देश को भी हवा में उड़ाते हुए विश्वविद्यालय के महत्वपूर्ण पदों को रेवड़ियों की तरह चेेहतों को बांट दिए गए हैं। हालांकि मामले को लेकर विश्वविद्यालय में चर्चाओं के साथ-साथ शिकायतों का दौर भी शुरू हो गया है।
      बताते चलें कि कृषि विश्वविद्यालय अंतर्गत पशु चिकित्सा विज्ञान और पशुपालन महाविद्यालय सहित अन्य महाविद्यालय के अधिष्ठाता का प्रभार वरिष्ठता क्रम में संबंधित प्राध्यापकों को प्रदान किया जाता था किंतु पशु चिकित्सा और पशु पालन महाविद्यालय में अधिष्ठाता पद को लेकर विवाद छिड़ गया था। महाविद्यालय के अधिष्ठाता रहे डॉ हरनाम सिंह के सेवानिवृत्ति होने के पूर्व 13 फरवरी 2020 को राजभवन से जारी आदेश के क्रम में विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ पी के सिंह ने बीते 24 जून 2020 को एक आदेश पारित किया कि डॉ हरनाम सिंह अधिष्ठाता पद का प्रभार विश्वविद्यालय के निदेशक प्रशासन एवं परिवीक्षण को हस्तांतरित कर दें। इस बीच अधिष्ठाता पद दिए जाने में वरिष्ठता को नजरअंदाज कर मनमाने ढंग से प्रभार दिए जाने की शिकायत पशुपालन महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ वी के सिंह ने कुलाधिपति तक से कर डाली थी। मामले में पेंच फंसता देख मात्र 1 माह बाद विश्वविद्यालय के प्रशासनिक अधिकारी डॉक्टर ए के सिंह द्वारा दूसरा महिमामंडित आदेश जारी किया गया। जिसमें डॉ आरके जोशी प्राध्यापक एवं अध्यक्ष वेटरनरी माइक्रोबायोलॉजी पशु चिकित्सा विज्ञान एवं पशुपालन महाविद्यालय स्वच्छ एवं कुशल प्रशासन की प्रतिभा के दृष्टिगत विश्वविद्यालय हित में अधिष्ठाता पशु चिकित्सा विज्ञान एवं पशुपालन महाविद्यालय (वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार सहित) नामित कर दिया गया। जिसके बाद अधिष्ठाता सहित विश्वविद्यालय के निदेशक प्रशासन एवं परिवीक्षण का प्रभाव डॉ आर के जोशी के पास रहा।
       मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य तो यह है कि विश्वविद्यालय के कुलपति रहे प्रो अख्तर हसीब ने पशु चिकित्सा विज्ञान एवं पशुपालन महाविद्यालय ने डॉक्टर आर के जोशी के कार्यों से नाराज होकर उनकी सेवा पुस्तिका को लाल लाल करते हुए उन्हें कई दंड भी दे दिए थे। जिसका परिणाम रहा कि बीते 7 अगस्त को उन्हें पशुपालन महाविद्यालय के अधिष्ठाता का प्रभार दिए जाने संबंधी आदेश में खूब महिमामंडित करते हुए स्वच्छ छवि एवं कुशल प्रशासक की प्रतिभा से अलंकृत किया गया है। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ बिजेंद्र सिंह के आदेशों निर्देशों की अवहेलना करने के चलते अभी बीते 29 जून 2021 को कुलपति के निजी सचिव डॉ जसवंत द्वारा विश्वविद्यालय के कुलपति के निर्देश के क्रम में चिकित्सा विज्ञान एवं पशुपालन महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉक्टर आर के जोशी से विश्वविद्यालय के निदेशक प्रशासन एवं परिवीक्षण का प्रभार छीने जाने संबंधी आदेश जारी किया गया था। उनसे विश्वविद्यालय का महत्वपूर्ण पद छीने जाने के बाद विश्वविद्यालय कर्मियों में खुशी की लहर भी दौड़ गई थी। यही नहीं इसके अलावा विश्वविद्यालय के गृह विज्ञान महाविद्यालय में भी अधिष्ठाता के महत्वपूर्ण पद पर अनियमितताओं की कृपा बरकरार है। जिसके चलते विश्वविद्यालय के कुलपति की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगने शुरू हो गए हैं।

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